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Thursday, February 14, 2013

ऋतु-राज बसंत


बसंत ऋतु या बसंत पंचमी के बारे में कुछ भी लिखने से पूर्व मई आप सब भक्त-मित्रों से क्षमा माँगना चाहता हूँ। इस बार एक काफी लम्बे अंतराल के बाद आप सबसे मिल रहा हूँ। पहले तो मै स्वयं अस्वस्थ्ताओं का शिकार हो गया और उसके पश्चात् मेरे बहुत करीबी रिश्तेदार मुझे हमेशा के लिए छोड़कर प्रभु श्री बांके बिहारी के चरणों में लीन हो गए। इसलिए मई कोई लेख नहीं लिख पाया। पर अब बसंत ऋतु भी दस्तक दे चुकी है, और उसी विषय पर मेरा यह लेख आधारित है। आशा है आपको पसंद आएगा। 

आप सब जानते हैं कि हमारे देश में 6 ऋतु होती हैं, और उनमे से प्रमुख है बसंत ऋतु जो माघ और फाल्गुन मास में मनाई जाती है। भगवान् श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मई ऋतुओं में बसंत हूँ, इसलिए इस ऋतु को ऋतु राज भी कहा जाता है। यह खुशहाली और हरीतिमा का प्रतीक है और मुख्या रूप से दो प्रमुख पर्व इस समय मनाये जाते हैं। सर्वप्रथम बसंत पंचमी जिस दिन विद्या संगीत की देवी माँ शारदा की उपासना की जाती है और दूसरा पर्व होली होता है जिसे पूरे भारत में बड़े रंगीन तरीके से मनाया जाता है। यदि बसंत पंचमी की बात करें तो माघ मास, शुक्ल पक्ष, पंचमी को बसंत पंचमी कहते हैं। इस दिन पीत रंग का विशेष महत्त्व होता है क्योंकि पंजाब के खेतों में पीली सरसों लहलहा रही होती है और इस दिन से उस फसल की कटाई शुरू हो जाती है। संगीत और विद्या प्रेमी लोग इसे माँ शारदा की भक्ति का दिन मानते हैं और पीत वस्त्र धारण करने की भी प्रथा बहुत प्रचिलित है। मैंने भी माँ के आशीर्वाद से अपनी कलम से उनके लिए कुछ लिखा है, आप सबके लिए प्रस्तुत है:

वीणा है शोभायमान जिन कर कमलों में  
सुंदर कमल का क्या आसन सजाया है 
कोटि रावियों के जैसा तेज मुख कमल पे 
कमल से नैनो में क्या प्यार समाया है 
आली मुस्कान है कमल से अधरों पे 
चरण कमल में ये शीश झुकाया है 
विद्या-संगीत की देवी श्वेत वर्णी हैं 
कमलों से कोमल शारदा महामाया है 

करते हैं ध्यान सदा आपका ही ज्ञानी जन, 
मुनियों ने आपके गुणों का गान गाय है 
सभी देवी देवता नवाते सर आपको 
राम चन्द्र का भी काम अपने बनाया है 
सारे राग सारे स्वर रहते आपके अधीन 
पर पार आपका किसी ने भी न पाया है 
महामाया इस ही लिए तो तुम्हे कहते हैं 
जग से निराली महा शारदा की माया है 

अब यदि बसंत ऋतु की बात करे तो यह पर्व हमारे पंजाब के भाई सबसे ज्यादा उल्लास के साथ मानते हैं। पंजाब में एक गाँव है जिसका नाम है फिरोजपुर। इस गाँव का बसंत पंचमी देश विदेश में प्रचिलित है। यहाँ इसे पतंग उड़ा  कर मनाया जाता है और विदेशों से भी अनेक सैलानी यहाँ केवल यह पतंग उत्सव देखने के लिए आते हैं। यह पर्व सर्द मौसम के विश्राम का प्रतीक होता है और इस दिन पृथ्वी, सूर्य नारायण और माँ गंगा की भी पूजा का विधान होता है। केवल भारत में नहीं, हमारे पडोसी मुल्क पकिस्तान में भी यह पर्व मनाया जाता है और वहां इसे उर्दू में जश्न-इ-बहारां कहा जाता है। मुख्य र्रोप से यह त्यौहार पाकिस्तान के लाहौर में मनाया जाता है परन्तु अब इसकी ख्याति कराची, इस्लामाबाद, गुजरांवाला इत्यादि अन्य क्षेत्रों में भी पहुँच रही है। पकिस्तान के मुस्लिम भाइयों में भी बसंत के इस त्यौहार को पहुंचाने का श्रेय सूफी संतो को जाता है। सूफी कवियों ने अपनी रचनाओ में इस पर्व का इतना उल्लेख किया है कि पाकिस्तान भी इनसे प्रभावित हुए बिना न रह सका। निजामुद्दीन औलिया, ख्वाजा भक्तियार काकी और यहाँ तक की आमिर खुसरो साहब ने भी इस बसंत को बेहद रूहानी तरीके से अपनी कलम से चित्रित किया। खुसरो साहब के बसंत से कुछ पंकितयां याद आई हैं:

आज बसंत मनाले , सुहागन, आज बसंत मनाले  
अंजन-मंजन कर पिया मोरी, लम्बे नेहर लगाले 

तू क्या सोवे नींद की मासी, सो जागे तेरे भाग 
सुहागन, आज बसंत मनाले

ऊंची नार के ऊंचे चितवन,  एसो दियो है बनाये 
शाह आमिर तुहे देखन को, नैनो से नैन मिलाये 
सुहागन, आज बसंत मानले 

परन्तु मुझे एक बात पर बेहद दुःख होता है। आप सब जानते है आज लोग प्रेम चतुर्दशी भी मन रहे हैं या यूँ कहूं की प्रेम चतुर्दशी ही मन रहे हैं। किसी को ख्याल नहीं है कि हमारे धर्म का भी एक विशेष पर्व है जिसका हमें सम्मान करना चाहिए। मई उस सभ्यता का भी विरोध नहीं करता, मै विरोध करता हूँ इस बात का कि लोग हिन्द को भूल गए। मेरी नज़र में तो ये दुस्साहस ही है कि उस असीमित प्रेम को एक दिन के बंधन में बाँध दिया लोगों ने। और आज सब अपनी लाज शर्म त्याग के प्रेम की गरिमा को कलंकित कर रहे होंगे उसमे किसी को दोष नहीं दिया जाएगा। फिर भी, मुझे यकीन है जो लोग इस लेख को पढ़ रहे हैं, उन्हें तो अपनी संस्कृति और उसकी मर्यादा का पूरा ध्यान होगा और उसे बचने में वो पूरा सहयोग करेंगे। आप सबको बसंत पंचमी की बहुत बहुत शुभकमाना। 

18 comments:

  1. Bhagwan kaali kaamar kyon odhte hai? Yeh Bhishma Pitamaha ke prasang mein aata hai..Gurudev iske bare mein keh rahe theh tab hamare yahaan bijli chali gayi..
    Yadi kisi ko yaad ho, tho krupaya bataye.

    Radhe Radhe |

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    1. Ye kaali kamar hamari radha rani ka prashad hai. ab prabhu vrindavan me the, to kishori ji ne unhe uphaar swaroop ye di thi aur isliye prabhu kabhi is kaali kamar ko apne se alag nahi kiya.

      Radhey ju Kripa Kare

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  2. parnam guru dev...........jai jai shri radhye

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  3. I want to go to Vrindavan.
    But I keep facing obstacles. :-(
    Wonder what to do?
    I keep chanting Radhe Radhe everyday, keep listening to Shrimad Bhagavad, when will Bihariji and Radha Rani call me to Vrindavan?
    Prabhu please mujhe apne paas bulaa lo!

    Shri Radhe |

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  4. koti koti parnam guru ji aur guru dev ji ke shri charno mai...........je tu na fadda sadi bahn ki asin rull jana si...saanu kite na mildi than ke asin rull jana si..

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  5. Shrimad Bhagwat Manglacharan



    गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वरा ।
    गुरुर साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

    बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं ।
    बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम ॥
    रंध्रान्वेणोरधरसुधयापूरयन्गोपवृन्दैर ।
    वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद्गीतकीर्तिः ॥ (S.B. 10.21.5)

    गोपाल बालम् भुवनेक पालम् संसार माया मति मोह जालम् |
    यशो विशालम् शिशुपाल कालम् बालम् मुकुन्दं मनसा स्मरामि ||

    यं प्रव्रजन्तमनुपेतमपेतकृत्यं द्वैपायनो विरहकातर आजुहाव |
    पुत्रेति तन्मयतया तरवोभिनेदुस्तं सर्वभूतह्रदयं मुनिमानतोअस्मि || (S.B. 1.2.2)

    नमः कुञ्ज बिहारण्यै नमः कुञ्ज बिहारिणे |
    स्वामी श्री हरिदासाय गुरुनाम गुरवे नमः ||

    गुर्वर्थे त्यक्तराज्यो व्यचरदनुवनं पद्मपद्मयां प्रियायाः
    पाणिस्पर्शाक्षमाभ्यां म्रजितपथरुजो यो हरिन्द्रानुजाभ्याम् |
    वैरूप्याच्छूर्पणख्याः प्रियविरहरुषारोपितभ्रूविजृम्भ
    त्रिस्ताब्धिर्बद्धसेतुः खलदवदहनः कोसलेन्द्रोऽवतान्नः || (S.B. 9.10.4)

    देहम सदा परिभवऽघ्नम् अभिष्ट दोऽहं |
    तीर्थस्पदम् सिव विरञ्चि नुतम् सरण्यम् ||
    वृह्यैर्थि हम् प्रणत पाल भवाब्धि पोतम् |
    वन्दे महा पुरुष ते चरणऽरविन्दम् ||

    कृष्ण त्वदीयपदपङ्कजपञ्जरान्तम्
    अध्यैव मे विशतु मानसराजहंसः |
    प्राण प्रयाण समये कफ़वातपितैः
    कण्ठावरोधनविधौ स्मरणं कुतस्ते || (Mukunda Mala Stotram)

    अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं |
    सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वतजातं नमामि || (Sunderkand)

    नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् |
    देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत || (S.B. 1.2.4)

    मंगलं भगवान विष्णुं मंगलं गरुडध्वज |
    मंगलं पुण्डलीकाक्षो मंगलाय तनो हरिः ||

    हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे |
    हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ||

    ---

    मेरी भव बाधा हरो श्री राधा नागरी सोय |
    जा तन कि ज्हायि परे तो श्याम हरित द्युति होय ||

    श्री राधे मेरी स्वामिनि मै राधे जु को दास |
    जनम जनम मोहे दीजियो श्री वृन्दावन को वास ||

    लाख बार हरि हरि कहे एक बार हरिदास |
    अति प्रसन्न श्री लाडली सदा विपिन को वास ||

    मेरो मन माणिक गिरवि धरो श्री मनमोहन के पास |
    प्रेम ब्याज इतनो बढ्यो कि न छूटन की आस ||

    जय जय श्री राधा रमण जय जय नवल किशोर |
    जय गोपी चित्त चोर प्रभु जय जय माखन चोर ||

    भक्ति भक्त भगवन्त गुरु चतुर नाम वपु एक |
    इनके पद वंदन किये तो नाशत विघ्न अनेक ||

    ---
    बोलो श्री वृन्दावन बिहारी लाल कि जय |
    बाल कृष्ण लाल की जय |
    श्रीमद भागवद महापुरान की जय |
    श्री शुकदेव जी महाराज की जय |
    पवन सुत श्री हनुमान जी महाराज की जय |
    जय जय श्री राधे || जय जय श्री राधे || जय जय श्री राधे ||

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    1. Thanxs For Posting this...
      Very Thanxs...
      Shree Radhe...

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    2. Welcome ji.
      Thanks tho Gurudev ko hai, jo hamein roz yeh amrut pilate hain!

      Radhe Radhe|

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  6. Please can you share wallpaper or photo of Shri Banke Bihariji?
    I wanted to print it (A4 size) and keep in my Puja room at home. I searched for it on the Internet, but could only find some paintings of Banke Bihariji or pictures of Sneh Bihariji.

    Thanks,
    Radhe Radhe |

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  7. radhye sada mujh par reham ki nazar rakhna mai daas tumhara hun itni to khabar rakhna.....kahi dub na jaau mai mera haath pakad rakhna........

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  8. guru dev ke to sare hi bhajan bahut surile aur pyare hote hai ye bhajan to bahut hi achha laga mujhye guru dev ko aur guru ji aur unn ke pure parivar ko meri or se sharad purnima ki bahut bahut badhai aur aap ko bhi .....Anshu ji

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  9. Anshu ji ye page bahut dino kaya mahino se update nahi hua aap kahi gaye huye thye Basant ritu ke baad to bahut si rituye beet chuki bahut si kathaye bhi ho chuki bade guru ji ki aur chote guru ji ki aap ne upcomimg progrem bhi nahi daale

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  10. mere pujya guru dev ke shri charno mai koti koti parnam .....radhye sada mujh par rehmat ki nazar rakhna.....

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  11. Radhye radhy prince ji

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  12. Jai jai shri radhye Ansu ji

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  13. Parnam Ansu ji... Bahut bahut mubarak ji guru dev ne Dilshad garden mai kaha kI WO bahut jaladi fb join karne waLE hai aur sab KO apne saath judne wale hai

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  14. AB lagta hai sayed meri samsya KA samarpan bhi mike jayega samarpan nA milega to bhi meri baat KA Uttar to denge hi guru dwv kiyu kI teen saalo SE WO mujg SE hi nahi mile yaha tak guru poornima KO bhi nahi aur katha SE bhi mujhye beijat kar KE nikal dete hai aisa kaun sa paap kiya hai Maine JO guru dwv aisa kartr hai mere saath agar mai paapin hun to WO guru hai mere paap. To bahi maf karwa sakte hai mujhye bahut khushi hui kI guru dev SE AB sihi baat ho paya karegi..

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  15. radhye radhye ji

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