Home

Sunday, December 18, 2011

आगामी कार्यक्रम

दिल्ली में निवास करने वाले पूज्य गुरुदेव के भक्तो के लिए एक बहुत बड़ी खुशी कि बात हम यहाँ बताने जा रहे हैं. गुरूजी कि कृपा अपने दिल्ली के भक्तों पर बरसने वाली है क्यूंकि अगले कुछ दिनों में यहाँ एक के बाद एक तीन कथाओं का आयोजन किया जा रहा है. नीचे पूज्य गुरुवार के आगामी कार्यक्रमों कि सूचि दी जा रही है:

परम श्रधेय आ० गो० श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी महाराज 

1.) 17 दिसम्बर 2011 से 23 दिसम्बर 2011 : भोपाल, मध्य प्रदेश  

2.) 25 दिसम्बर 2011 से 31 दिसम्बर 2011 : कोल्कता 

3.) 02 जनवरी 2012 से 08 जनवरी 2012 : रामलीला मैदान, पी.यु. ब्लाक, पीतमपुरा, दिल्ली 
(इस कथा का सीधा प्रसारण केवल अध्यात्म चैनल पर)

4.) 10 जनवरी 2012 से 16 जनवरी 2012 : भवानी निकेतन स्कूल ग्राउंड, जयपुर 

5.) 26 जनवरी 2012 से 01 फरवरी 2012 : आदर्श नगर, दिल्ली 


परम श्रधेय आ० गो० श्री गौरव कृष्ण शास्त्री जी महाराज 

1.) 17 दिसम्बर 2011 से 23 दिसम्बर 2011 : कोल्कता 

2.) 25 दिसम्बर 2011 से 31 दिसम्बर 2011 : कमला नगर, दिल्ली 
(इस कथा का प्रसारण केवल अध्यात्म चैनल पर)
दिनाक- 26  से 1 जनवरी तक 
समय- 3 से गुरु इच्छा  तक 

3.) 10 जनवरी 2012 से 16 जनवरी 2012 : पडरौना, उत्तर प्रदेश 


~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ राधे राधे राधे राधे राधे ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~


कमला नगर में कथा की जानकारी 

कथा व्यास : परम पूज्य श्रधेय गौरव कृष्ण शास्त्री जी महाराज 
दिनांक : 25 दिसम्बर 2011 से 31 दिसम्बर 2011
समय : दोपहर २ बजे से सायं ६ बजे तक 
कथा स्थल : " श्री मधुबन वाटिका ", बिरला स्कूल ग्राउंड, कमला नगर, दिल्ली 

(इस कथा का प्रसारण केवल अध्यात्म चैनल पर देखा जा सकता है)

दिनाक- 26  से 1 जनवरी तक 
समय- 3 से गुरु इच्छा  तक 

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ राधे राधे राधे राधे राधे ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~


"" विशेष जानकारी ""
पिछले कुछ दिनों में हमें आप सब से बहुत सारा प्यार मिला है. अनेक भक्तों ने अपने भाव हम तक पहुचाएं और उनका सहयोग सराहनीय है. आप सब भक्तों के विश्वास और आस्था को देखते हुए यह बात बतानी हमारे लिए अति-आवश्यक हो गयी थी. हम यह बताना चाहते हैं कि यह ब्लॉग हम भक्तों के मिलने का एक स्थान है. इस ब्लॉग के जरिये हम अनेक भक्तों के निकट आये है और भक्तों की भावनाओ से भी हम परिचित हुए. जैसा कि पहले भी कई बार बताया जा चुका है, आज फ़िर से हम यह बताना चाहते हैं कि इस ब्लॉग से पूज्य बड़े गुरुदेव या पूज्य छोटे गुरुदेव या उनके किसी भी कार्यकारी सदस्य का व्यक्तिगत रूप से कोई सम्बन्ध नहीं है. वैसे तो यह ब्लॉग गुरूजी के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं है परन्तु यहाँ पर डाले गए लेख गुरु जी के भागवत से मिला ज्ञान और भक्तों के अपने विचार हैं. उनमे गुरूजी का साक्षात् रूप से कोई योगदान नहीं है. यह ब्लॉग गुरुदेव द्वारा नहीं अपितु गुरुदेव की कृपा से चल रहा है. हमने यह कोशिश की है कि समय समय पर आपको यह जानकारी देते रहे जिससे कोई भी भक्त यह उम्मीद न रखे कि वह सीधे गुरूजी के संपर्क में है. हम आपकी भावनाओ कि बहुत इज्ज़त करते हैं, इसलिए हम प्रयासरत हैं कि किसी भी प्रकार से आपकी भावनाओ को ठेस न पहुचे परन्तु फ़िर भी जाने-अनजाने में यदि हमारे किसी कर्म से ऐसा हुआ है तो उसके लिए हम सब हाथ जोड़ के आपसे क्षमा याचना करते हैं. जैसा कि गुरूजी ने स्वयं शरद पूर्णिमा पे कहा था कि उनका खाता तो सिर्फ बांके बिहारी जी के चरणों में है, हम सब उनके श्री चरणों में यह विनती करते हैं कि वो हमें इस काबिल बनाये कि हम भी राधा राणी के चरणों में अपने जीवन का खाता खोल सके. 

प्रसारण जानकारी 
पूज्य बड़े गुरुदेव श्रधेय आचार्य गोस्वामी श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी महाराज की कथा का भोपाल, मध्य प्रदेश से विशेष प्रसारण आप देख सकते हैं दोपहर ३ बजे से केवल अध्यात्म चैनल पर. 

~*~*~*~*~*~*~ राधे राधे राधे ~*~*~*~*~*~*~

          

Wednesday, December 7, 2011

बांके बिहारी की मुरलिया

मोहन के लब पे देखो, क्या खुशनुमा है बंसी
बंसी पे लब फ़िदा है या लब पे फ़िदा है बंसी
मुर्दे को करदे जिन्दा और जिन्दे को करदे मुर्दा
ये खुद खुदा नहीं, पर शान-ऐ-खुदा है बंसी

भगवान श्री बांके बिहारी जी को बांसुरी अत्यंत प्रिय है. हम मुरली के बिना ठाकुर जी कि कल्पना भी नहीं कर सकते. यह कोई साधारण बंसी नहीं है, इस बंसी के तो इतना प्रभाव है कि इस मुरली की तान ने भगवान भोलेनाथ की भी समाधी भंग कर दी थी. सब गोपियाँ इस मुरली को सुन के बावरी हो जाती थी. इस का प्रभाव तो यहाँ तक बताया जा चुका है कि जब भगवान बांसुरी बजाते थे, तो समय भी मानो उनको सुनने के लिए ठहर जाता था. 

क्या आपने कभी यह सोचा है कि भगवन ने केवल बांसुरी को इतना बड़ा सौभाग्य क्यों दिया कि बांसुरी हमेशा उनके साथ रहती है और उनके अधरामृत का पान भी करती है. वाद्य यन्त्र तो और भी अनेक हैं पर प्रभु ने केवल बांसुरी को ही क्यों चुना. अनेक टीकाकारों ने इसके अनेक कारण बताये हैं पर जैसा पूज्य गुरुदेव से सुना है आप सब को बताने जा रहा हू. 

भगवान को बांसुरी इसलिए प्यारी है क्यूंकि इसमें ऐसे तीन गुण है जो अन्य किसी भी वाद्य यन्त्र में नहीं होते. और इन्ही तीन गुणों के प्रभाव से बांसुरी भगवान के अधरों पर विराजमान हो गयी. 

बांसुरी का पहला गुण है कि यह अपने आप नहीं बजती. अर्थार्थ जब इसे फूंक मार के बजाया जायेगा तभी यह बजेगी. तो आप प्रश्न कर सकते हैं कि ऐसे तो कोई भी वाद्य यन्त्र अपने आप नहीं बजता, सबको बजाना ही पड़ता है. पर यदि आप मुरली से ठोकर खाते हैं, तो यह आपका रास्ता नहीं रोकती, स्वयं एक ओर हो जाती है और आपको कभी हानि नहीं पहुंचाती. अब आप कभी ढोलक से टकरा के देखना. खुद तो बजेगी ही आपको भी बजा देगी. पर मुरली बड़ी शांत स्वाभाव की है. 

इसका दूसरा गुण है कि यह सदा मीठा बोलती है. कोई बालक जिसे बांसुरी बजानी नहीं आती है, यदि वेह भी इसको बजाता है तो इसका स्वर कर्कश नहीं लगता. हमेशा मधुर ही लगता है. और यदि किसी को बजानी आती हो तो व्यक्ति इसकी तान में ही खो जाते हैं. परन्तु अन्य यन्त्र केवल उसी व्यक्ति के हाथ में शोभा देते हैं जो उन्हें बजाना जानता हो. अन्यथा तो बहुत कर्कश ध्वनि उनमे से निकलती है. 

मुरली का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण गुण है उसकी सरलता और उसका भोलापन. आप देख सकते हैं कि मुरली में कभी कोई गांठ नहीं होती. यह ऊपर और नीचे से एक समान होती है और अंदर से खोखली भी होती है. ये जैसे ऊपर से दिखती है वैसी ही ये अंदर से भी है. 

बंधुओ, यदि बांसुरी के ये तीन गुण हम अपने अंदर भी जागृत कर लें, तो विश्वास रखिये कि भगवान आपको अपने अधरामृत से वंचित नहीं रख पाएंगे. वो आपको भी वही स्थान दे देंगे जो उन्होंने मुरली को दे रखा है. कहने का तात्पर्य यह है कि आप भी बिना कारण के मत बोलिए. जब बहुत आवश्यकता हो तभी बोलिए, व्यर्थ में इस जिह्वा का उपयोग न करें. और जब भी उपयोग करें दूसरों कि भलाई के लिए करें. हमेशा मधुर वाणी बोलिए. यदि कोई आपके साथ अपशब्द प्रयोग भी करता है तो आप उसे उसकी भाषा में जवाब देने के स्थान पर मधुर वचन बोलिए, तो सामने वाला व्यक्ति अपने आप लज्जित हो जायेगा और उसे अपनी भूल का एहसास भी हो जायेगा. पूज्य गुरुदेव कहा करते हैं:
दुनिया कभी किसी को मुहब्बत नहीं देती 
इनाम तो चाहती है पर कीमत नहीं देती
देने को तो दे सकता हूँ मै भी तुम्हे गाली
पर मेरी तहज़ीब मुझे इसकी इजाज़त नहीं देती
और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण गुण, कि आप भी अपने अंदर से हर प्रकार कि गांठ को मिटा दीजिए. इर्ष्या, घृणा, राग, द्वेष जैसे जो दुर्गुण है उन्हें अपने अंदर ने निकल दीजिए, सबके साथ एक समान व्यव्हार करिये और अपने अंदर भोलेपन को जागृत करिये. सहज रहने कि आदत डाल लीजिए और हर कदम पे, हर साँस पे प्रभु कि कृपा का अनुभव करिये और खुश रहिये. 

यदि ये सरे गुण आप अपना लेते हैं तो आप भी भगवान को मुरली के समान ही प्यारे लगोगे. आशा करता हूँ कि आपको इस जानकारी से कुछ लाभ अवश्य होगा और यह बातें आपको प्रभु के नज़दीक ले जाने में सहायक अवश्य होंगी. 

विशेष सूचना 
परम श्रधेय आ० श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी की कथा का गुना, मध्य प्रदेश से विशेष प्रसारण केवल अध्यात्म चैनल पर देख सकते हैं. 
समय 
सुबह 10:40 से दोपहर 02:00 बजे तक 

राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे 

Monday, November 28, 2011

बिहार पंचमी


ब्रज में प्रकटे हैं बिहारी, जय बोलो श्री हरिदास की
भक्ति ज्ञान मिले जिनसे, जय बोलो गुरु महाराज की 

मार्गशीर्ष, शुक्ल पक्ष, पंचमी को ही हमारे वृन्दावन बिहारी श्री बांके बिहारी जी का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है. इसी दिन अप्रकट रहने वाले प्रभु साक्षात् नित्य वृन्दावन में निधिवन में प्रकट हो गए थे. तीनो लोकों के स्वामी को इस दिन रसिक सम्राट स्वामी श्री हरिदास जी महारज ने जीत लिया था और वो अपने सभी भक्तों को दर्शन देने के लिए उनके सामने आ गए थे. 

स्वामी श्री हरिदास जी निधिवन के कुंजो में प्रतिदिन नित्य रास और नित्य विहार का दर्शन किया करते थे और अत्यंत सुंदर पद गया भी करते थे. वो कोई साधारण मनुष्य नहीं थे, भगवन कि प्रमुख सखी श्री ललिता सखी जी के अवतार थे. जब तक वो धरती पर रहे, उन्होंने नित्य रास में भाग लिया और प्रभु के साथ अपनी नजदीकियों का हमेशा आनंद उन्हें प्राप्त हुआ. उनके दो प्रमुख शिष्य थे. सबसे पहले थे उनके अनुज गोस्वामी जगन्नाथ जी जिनको स्वामी जी ने ठाकुर जी की सेवा के अधिकार दिए और आज भी वृन्दावन में बांके बिहारी मंदिर के सभी गोस्वामी जगन्नाथ जी के ही कुल के हैं. उनके दूसरे शिष्य थे उनके भतीजे श्री विठ्ठल विपुल देव जी. बिहार पंचमी के दिन विठ्ठल विपुल देव जी का जन्मदिन भी होता है. 

स्वामी जी के सब शिष्य उनसे रोज आग्रह किया करते थे कि वो खुद तो रोज नित्य विहार का आनंद उठाते है कभी उन्हें भी यह सौभाग्य दें जिससे वो भी इस नित्य रास का हिस्सा बन सके. पर स्वामी जी ने कहा की सही समय आने पर उन्हें स्वतः ही इस रास का दर्शन हो जायेगा क्योंकि रास का कभी भी वर्णन नहीं किया जा सकता. इसका तो केवल दर्शन ही किया जा सकता है और वो दर्शन आपको भगवान के आलावा कोई नहीं करा सकता. स्वामी जी का एक कुञ्ज था वो जहा वो रोज साधना किया करते थे. उनके सभी शिष्य इस बात को जानने के लिए काफी व्याकुल थे कि ऐसा क्या खास है उस कुञ्ज में. एक दिन जिस दिन विठ्ठल विपुल देव जी का जन्मदिन था, स्वामी जी ने सबको उस कुञ्ज में बुलाया. जब सब विठ्ठल विपुल देव जी के साथ उस कुञ्ज में गए तो सब एक दिव्या प्रकाश से अंधे हो गए और कुछ नज़र नहीं आया. फ़िर स्वामी जी सबको अपने साथ वह लेकर आये और सबको बिठाया. स्वामी जी प्रभु का स्मरण कर रहे थे, उनके सभी सिष्य उन का अनुसरण कर रहे थे और सबकी नज़रे उस कुञ्ज पर अटकी हुई थी और सब देखना चाहते थे कि क्या है इस कुञ्ज का राज़. तो सबके साथ स्वामी जी यह पद गाने लगे

माई री सहज जोरी प्रगट भई जू रंग कि गौर श्याम घन दामिनी जैसे
प्रथम हूँ हुती अब हूँ आगे हूँ रहीहै न तरिहहिं जैसें 
अंग अंग कि उजराई सुघराई चतुराई सुंदरता ऐसें 
श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी सम वस् वैसें 




स्वामी जी कि साधना शक्ति से उन दिन उन सबके सामने बांके बिहारी जी अपनी परम अह्लाद्नी शक्ति श्री राधा राणी के साथ प्रकट हो गए.

चेहरे पे मंद मंद मुस्कान, घुंघराले केश, हाथों में मुरली, पीताम्बर धारण किये हुआ जब प्रभु कि उस मूरत का दर्शन सब ने किया तो सबका क्या हाल हुआ उसका वर्णन नहीं किया जा सकता. वे अपनी पलक झपकाना भी भूल गए और ऐसे बैठे हुए हैं मानो कोई शरीर नहीं बल्कि एक मूर्ति हैं. 

स्वामी जी कहते है कि देखो प्रभु प्रकट हो गए हैं. प्रभु कि शोभा ऐसी ही है जैसी घनघोर घटा कि होती है. यह युगल जोड़ी हमेशा विद्यमान रहती है. प्रकृति के कण कण में युगल सरकार विराजमान है. और ये हमेशा किशोर अवस्था में ही रहते हैं. स्वामी जी के आग्रह से प्रिय और प्रीतम एक दूसरे के अंदर लीन हो गए और फ़िर वही धरती से स्वामी जी को एक दिव्या विग्रह प्राप्त हुआ जिसमे राधा और कृष्ण दोनों का रूप है और इसी विग्रह के माध्यम से ठाकुर जी हमें श्री धाम वृन्दावन में दर्शन देते हैं. यही कारण है कि ठाकुर जी का आधा श्रृंगार पुरुष का होता है और आधा श्रृंगार स्त्री का होता है. 

यह त्यौहार श्री धाम वृन्दावन में आज भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है. सुबह सबसे पहले निधिवन में प्रभु के प्राकट्य स्थल में जो भगवन में प्रतीक चरण चिन्ह है उनका पंचामृत अभिषेक किया जाता है. फ़िर एक विशाल सवारी स्वामी जी की वृन्दावन के प्रमुख बाजारों से होती हुई ठाकुर जी के मंदिर में पहुँचती हैं. स्वामी जी कि सवारी में हाथी, घोड़े, कीर्तन मंडली इत्यादि सब भाग लेते हैं. सवारी के सबसे आगे तीन रथ चलते हैं. इनमे से एक रथ में स्वामी श्री हरिदास जी, एक में गोस्वामी जगन्नाथ जी और एक रथ में विठ्ठल विपुल देव जी के चित्र विराजमान होते हैं. ये रथ रज भोग के समय ठाकुर जी के मंदिर में पहुँचते है और फ़िर तीनो रसिकों के चित्र मंदिर के अंदर ले जाये जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दिन ठाकुर जी हरिदास जी महाराज कि गोद में बैठकर उनके हाथों से भोग लगाते हैं. 

यदि आपको किशोरी जी इस दिन अपने धाम वृन्दावन में बुला लें तो आपका सौभाग्य है परन्तु यदि किशोरी जी नहीं भी बुलाती हैं तो मै आप सब से आग्रह करूँगा कि सुबह आप अपने घर पे ही बिहारी जी को भोग लगाये और संध्या के समय प्रभु की आरती करिये और उनके भजन में झूमते रहिये. आप पर कृपा ज़रूर बरसेगी. और आपको यह जानकार बहुत खुशी होगी कि इसी दिन भगवन श्री राम का जानकी जी के साथ विवाह भी हुआ था. इसलिए बिहार पंचमी को विवाह पंचमी भी कहा जाता है.


इस वर्ष बिहार पंचमी 29 नवम्बर 2011, मंगलवार को मनाई जायेगी. 

आपको बिहारी जी के प्राकट्य उत्सव की बहुत सारी बधाई  

~~~~~~~~~~~ राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे ~~~~~~~~~~~

Monday, November 21, 2011

Exclusive Pics Of Gwalior Katha & Upcoming Katha Schedules

 
                                                                ( Aan Kut Pooja )

राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे
राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे


राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे


(Kalash Yatra,First Day of katha)

राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे


(He Guru dev,un Bankhe Bihari ke Naino se to ap becha lete ho lekin Ye Apki Tirchi nain To hume Ghayal kar deti hai.. )

राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे




राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे

राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आगामी कथाएँ 


परम श्रधेय आ० गो० श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी महाराज 






१. 23 नवम्बर से 29 नवम्बर : राणी सती दादी मंदिर परिसर 
                                                 झुंझुनू, राजस्थान 

                        समय: दोपहर 2 बजे से 6 बजे तक 

       (इस कथा का सीधा प्रसारण केवल अध्यात्म चैनल पर)

२. 17 दिसम्बर से 23 दिसम्बर : भोपाल, मध्य प्रदेश

३. 25 दिसम्बर से 31 दिसम्बर : कोलकाता, पश्चिम बंगाल


"" विशेष कार्यक्रम ""

२७ नवम्बर २०११
कीर्तन तत्पश्चात भोजन 
सुबह १० बजे से दोपहर १२ बजे तक 

मृदुल वृन्दावन आश्रम
 जयपुर , राजस्थान 


परम श्रधेय आ० श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज 






१. 1 दिसम्बर से 7 दिसम्बर : गुना, मध्य प्रदेश

२. 9 दिसम्बर से 15 दिसम्बर : कोडरमा, झुमरीतलैया

३. 17 दिसम्बर से 23 दिसम्बर : कोलकाता

४. 25 दिसम्बर से 31 दिसम्बर : कमला नगर, दिल्ली 
                   














सभी कथाओं को LIVE या D-LIVE देखा जा सकता है, केवल अध्यात्म चैनल पर. 
अध्यात्म चैनल को इन्टरनेट पर देखने के लिए लॉग इन करे  http://www.adhyatmtv.com/

राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे~राधे

Saturday, November 5, 2011

Tulsi Vivah Katha And Katha Information


एक लड़की जिनका नाम वृंदा था राक्षस कुल मैं उनका जन्म हुआ था,बचपन से ही उनमें कृष्ण भक्ति के बीज की धीमी धीमी सुगंद आने लगी थी, पूरी जिन्दगी उन्होंने बड़े प्रेम भाव से प्रभु की सेवा पूजन किया,जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल रजाजलंदर से हुआ,जालंदर जल में ही जन्मा था,और वह राक्षस कुल का रजा था,लेकिन वृंदा जी इन सब से परी थी वह सिर्फ निष्टा पूर्व अपना पत्नी धरम का पालन करती थी.


शादी के कुछ समय पश्चात् देवताओ और दानव
में युद्ध हुआ,तभी वृंदा जी ने संकल्प लिया जब तक अप युद्ध से वापिस नही आजाते मैं पूजा मैं बेथ कर आपकी सलामती का अनुष्ठान करुँगी और संकल्प तब तक नही तोदुंगी जब तक अप वापिस नही आजाते,जलंदर जी युद्ध में चले गए और यह वृंदा जी ने अनुष्ठान आरंभ किया,वृंदा जी के अनुष्ठान ये प्रभाव हुआ,युद्ध में जलंदर जी को कोई देवता नही जीत सखा और हरते हुए भगवन विष्णु जी के पास गए..

सबने भगवान रख्षा की प्राथना की तो प्रभु ने कहा- वृंदा मेरी परम भक्त है मैं उसके साथ छल नही कर,उसकी भक्ति सची है.
तो देवता बोले-भगवन और दूसरा कोई उपाए नजर नही अब अप ही हमारी रख्षा करे और उपाए निकले.

तभी भगवान श्री विष्णु ने जलंदर का रूप धरा और वृंदा के सन्मुख जा के खड़े होगये,वृंदा ने जेसे ही अपने पति को देखा यह अनुष्ठान से उठ गई और अपने पति के चरण छुए,जेसे ही उनका अनुष्ठान टुटा वह देवताओ ने जलंदर का सर काट के अलग कर दिया और जलंदर का कटा सर वृंदा के महेल आ गिरा,वृंदा ने देखा तो वह सोच में पड़ गई मेरे पति का सर यह है,तो मेरे सामने जो खड़े है कौन है.??
                                                                                                                          वृंदा ने पुचा- अप कौन है.?
तभी भगवन अपने असली रूप मैं अगये और कुछ न बोले परन्तु वृंदा जी सब समझ गई और तभी वृंदा ने भगवान से कहा,आपको तनिक दया नही आई मेरे पति को मरवाते,में आपको को श्राप देती हु अप पत्थर के होजाओ.प्रभु तुरंत पत्थर के बन गए,तभी देव लोक में हाहाकार मच गया,सभी देवता वृंदा जी के पास अगये लक्ष्मी जी बेहद रो रो कर विलाप करने लगी,सबकी प्राथना सुनाने के बाद वृंदा जी ने प्रभु को श्राप से मुक्त किया और पति के सर के साथ अग्नि मैं सती होगी.

उनकी राख से फिर उसी समय एक पोधा निकला उसे देख भगवान विष्णु ने कहा- अज से इसका नाम तुलसी है. और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और मैं किसी भी वास्तु को बिना तुलसी के सवीकार नही करूँगा,यह मुझे प्राणों से भी प्यारी है,तभी से सभी देवताओ और मनुष्य ने तुलसी जी का पूजा आरंभ होगई,फिर अंत में सभी देवताओ ने कार्तिक मास की,देवउठन एकादशी के दिन शालिग्राम और तुलसी जी का विवाह किया जिसे अज भी हम पुरे प्रेम और श्रधा से मानते है.और इस दिन जो व्यक्ति तुलसी विवाह कथा सुनता या पड़ता उसे अजीवन भक्ति का वरदान मिलता है.

सोभाग्य की बात है व्हे दिन अज है अप सभी को हम सबकी और गुरुवर की और से तुलसी विवाह की बहुत बहुत बधाई..
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
Bade Guruji's katha live telecast only on adhyatm tv
Date-7 nov to 13 nov:
Location-theme park, kurukshetra
Timing-2:00 pm to 6:00 pm
organiser: shri bankey bihari seva trust

or

Date-23 nov to 29 nov
Location-Rani sati dadi mandir, jhunjhunu, rajasthan
Timing-2:00 pm to 6:00 pm
organiser-shri bhagwat mission trust

Chote Guru Gwalior katha detail


Date-8 nov to 14 nov
Timing - 12 to 4 noon
Location- Suresh nagar,tukoniya park ke pas,shiv mandir,tathipur,gwalior (M.P)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे राधे~राधे